अनुच्छेद 32 मूल अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए उपचार | Article 32 In Hindi

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अनुच्छेद 32: इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए उपचार

32(1): इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए समुचित कार्यवाहियों द्वारा उच्चतम न्यायालय में समावेदन करने का अधिकार प्रत्याभूत किया जाता है ।

32(2): इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों में से किसी को प्रवर्तित कराने के लिए उच्चतम न्यायालय को ऐसे निदेश या आदेश या रिट, जिनके अंतर्गत बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार-पृच्छा और उप्रेषण रिट हैं, जो भी समुचित हो, निकालने की शक्ति होगी ।

32(3): उच्चतम न्यायालय को खंड (1) और खंड (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, संसद, उच्चतम न्यायालय द्वारा खंड (2) के अधीन प्रयोक्तव्य किन्हीं या सभी शक्तियों का किसी अन्य न्यायालय को अपनी अधिकारिता की स्थानीय सीमाओं के भीतर प्रयोग करने के लिए विधि द्वारा सशक्त कर सकेगी ।

32(4): इस संविधान द्वारा अन्यथा उपबंधित के सिवाय, इस अनुच्छेद द्वारा प्रत्याभूत अधिकार निलंबित नहीं किया जाएगा ।

अनुच्छेद 32क: राज्य विधियों की सांविधानिक वैधता पर अनुच्छेद 32 के अधीन कार्यवाहियों में विचार न किया जाना । [संविधान (तैंतालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1977 की धारा 3 द्वारा (13-4-1978 से) निरसित ।]


  1. 42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 की धारा 6 द्वारा (3-1-1977 से) अंतःस्थापित ।

-संविधान के शब्द

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भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32, इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए उपचार

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