अनुच्छेद 2 नए राज्यों का प्रवेश | सिक्किम का भारत में एकीकरण | Article 2 In Hindi

पथ प्रदर्शन: भारतीय संविधान > भाग 1 : संघ और उसका राज्यक्षेत्र > अनुच्छेद 2

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 2 नए राज्यों का प्रवेश और स्थापना करने की शक्ति किसके पास है। उसके बारे में बताता है। 

अनुच्छेद 2: नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना 

संसद, विधि द्वारा , ऐसे निबंधनों और शर्तो पर, जो वह ठीक समझे, संध में नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना कर सकेगी।   

अनुच्छेद 2क: सिक्किम का संघ के साथ संयुक्त किया जाना। 36वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 की धारा 5 द्वारा (26-4-1975 से) निरसित | (हटा दिया गया)

-संविधान के शब्द

अनुच्छेद 2 का स्पष्टीकरण(Explanation)

यह अनुच्छेद संसद को दो शक्ति प्रदान करता है। 

पहली शक्ति : राज्यों को भारत के संध में  मिलाने की शक्ति , यह पहले से मौजूद राज्यों के लिए है। 

दूसरी शक्ति : नए राज्यों की स्थापना करने की शक्ति , यह शक्ति जो पहले राज्य नहीं थे उनके लिए है। 


अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संविधान में किया गया संशोधन अनुच्छेद 368 के अंतर्गत नहीं माना जायेगा , मतलब की संसद के सामान्य बहुमत से राज्य का प्रवेश या स्थापना हो जायेगा। अनुच्छेद 368 की तरह विशेष बहुमत की आवश्यकता नहीं है। 

इस अनुच्छेद के संशोधक विधेयक पसार न होने पर संसद का संयुक्त अधिवेशन बुलाया जा सकता है। 

Q. अनुच्छेद २ में बदलाव करने से किस अनुसूची में बदलाव होता है ?

A . अनुसूची 1 और अनुसूची 4 में बदलाव होता है।

भारत का संविधान अनुच्छेद 2 नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना

सिक्किम का भारत में एकीकरण (Integration of Sikkim into India)

भारत के संविधान में सिक्किम के एकीकरण से सम्बन्धित सांविधानिक घटनाएं बड़ी नाटकीय हैं।

ब्रिटिश काल में सिक्किम भारतीय रियासत थी जिसका आनुवंशिक शासक चोग्याल वंश था। यह ब्रिटिश शासन के अधीन था। हिमालय की इसकी सीमा 1890 में चीन के साथ संधि करके अंकित की गई थी। चोग्याल भारतीय राजाओं के संघ का सदस्य भी था।

जब भारत स्वतंत्र हुआ तब सिक्किम की जनता का एक भाग भारत के साथ विलय होना चाहता था किन्तु उस रियासत में राजा का शासन और उसकी सामरिक महत्व की स्थिति ने ऐसा होने नहीं दिया।

अतएव ब्रिटिश शासन की समाप्ति के पश्चात् सिक्किम और भारत सरकार के बीच एक संधि पर हस्ताक्षर किए गए जिसके अनुसार भारत सरकार ने सिक्किम की प्रतिरक्षा(Security), विदेश कार्य(International Relation) और संचार(Communication) के बारे में उत्तरदायित्व लिया।

सिक्किम में भारत सरकार का प्रतिनिधि एक राजनीतिक अधिकारी होता था जिसे भूटान का भी काम सौंपा जाता था। इस प्रकार सिक्किम भारत संघ द्वारा आरक्षित राज्य हो गया।

मई, 1974 में सिक्किम कांग्रेस ने राजा का शासन समाप्त करने का निर्णय किया और सिक्किम की विधान सभा ने सिक्किम शासन अधिनियम, 1974 पारित किया। इसका उद्देश्य सिक्किम से पूर्णतया उत्तरदायित्व शासन की उत्तरोत्तर प्राप्ति और भारत के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित करना था।

इस अधिनियम ने सिक्किम सरकार को यह शक्ति दी कि वह भारत की राजनीतिक संस्थाओं में सिक्किम के लोगों के प्रतिनिधियों के भाग लेने के लिए कदम उठाए जिससे सिक्किम का सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में तीव्र गति से विकास हो सके।

चोग्याल को बाध्य किया गया कि वह सिक्किम शासन अधिनियम को अनुमति दे। इस विधेयक के अधीन प्रभावी शक्ति सिक्किम की प्रतिनिधि विधान सभा के हाथों में चली गई और चोग्याल संवैधानिक अध्यक्ष बन गया।

सिक्किम शासन अधिनियम के अधीन दी गई शक्तियों का प्रयोग करके सिक्किम विधान सभा ने एक संकल्प पारित करके भारत के राजनीतिक और आर्थिक संस्थाओं में संयुक्त होने की और भारत के संसदीय तंत्र में सिक्किम के लोगों के प्रतिनिधित्व की इच्छा प्रकट की।

सिक्किम की इस इच्छा के चलते भारत ने 35वां संविधान संशोधन विधेयक पास किया और सिक्किम को भारत का ‘सहयुक्त राज्य’ बनाया। जिसमे अनुच्छेद 2क और अनुसूची 10 मे सुधार किया गया।

अगले साल 1975 मे 36वां संशोधन पसार किया । जिसमे अनुच्छेद 368(2) से शक्ति ले कर संसद ने पहली और चौथी अनुसूची तथा अनुच्छेद 80 और 81 मे संशोधन किया गया और 26 अप्रैल 1975 से अनुच्छेद 2क और दसवी अनुसूची का लोप किया गया । 

इस संशोधन से सिक्किम को भारत का 22 वां पूर्ण राज्य बना दिया गया । 


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